पेट्रोल में 20% एथेनॉल कही देश को इतने बड़े संकट में न डाल दे,ब्राज़ील से सीख लेने की जरुरत

Ethanol mixed Petrol: दुनिया जितनी तेजी से आधुनिकता की और जा रही है उतनी ही तेजी से यह आधुनिकता पर्यावरण को संकट में डाल रहा है.आज विश्व में हालत एसे ऐसे हैं कि कोई देश आधुनिकता की रफ़्तार को तो कम नहिं करना चाहते लेकिन पर्यावरण को संभालने के उपाय भी कर रहे हैं. ऐसा ही एक निर्णय भारत सरकार ने लिया है कि वर्ष 2025 तक भारत मे 20% एथेनाल मिलाया जाएगा.सरकार ने कदम तो दो कारणों से उठाया था.

पहला एथेनॉल को ग्रीन फ्यूल कहा जाता है. ऐसे में पेट्रोल में इसकी 20% एथेनॉल मिलाने से सालाना भारत के हजारों करोड़ रूपये भी बचेंगे.सरकार का यह कदम तो पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिहाज से काफी अच्छा भी है लेकिन आज हम आपको बताएंगे कि भारत में पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने के अपने निर्णय में क्यों ब्राज़ील के कड़वे अनुभवों से सीखने की जरूरत है.

नदियों में जाकर मिलता है विषैला प्रोडक्ट

ब्राज़ील में वर्ष 1964 से वर्ष 1985 तक सैन्य तानाशाही के दौर में गैसोलीन में एथेनॉल में 20% एथेनॉल मिलाने की छुट दी थी .निर्णय का असर यह हुआ कि ब्राजील में वर्ष 1979 में सिर्फ 0.3% कार ऐसी थी जो एथेनॉल से चल सकती है . लेकिन सिर्फ 6 वर्ष में वर्ष 1985तक 96% कार ब्राजील की सड़को पर एथेनॉल से चलने वाली आ गई थी . वहां के ज्यादातर किसान मुनाफे के चलते अपने खेतो में गन्ने की फसल उगने लगे . वर्ष 1979 में ब्राजील में 50 करोड़ लीटर एथेनॉल का निर्माण हुआ था . जबकि 1985 में 20 गुना ज्यादा 1 हजार लीटर एथेनॉल ब्राजील में प्रोड्यूस हुआ . लेकिन ब्राजील के गैसोलीन में 20% एथेनॉल मिलाने के निर्णय का असर यह हुआ कि आज ब्राजील के जलस्त्रोतो में पानी 80% तक घट गया है . असल में एक लीटर एथेनॉल बनाने में 10 से 16 लेटर विषैला बाई -प्रोडक्ट निकलता है जो नदियों में जाकर मिल जाता है .

किसानों को होगा जबरदस्त लाभ

भारत में अभी पेट्रोल में 9.45% एथेनॉल मिलाई जा रही है और वर्ष 2025 तक 20% एथेनॉल के पेट्रोल में मिलाने का निर्णय लिया गया है . इस पुरे मुद्दे पर पर्यावरण विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों की राय बिल्कुल अलग है . अर्थशास्त्री डॉ. विजय सरदाना के मुताबिक पेट्रोल में वर्ष 2025 तक 20% एथेनॉल की मिलावट भारत के सालाना 30 हजार करोड़ से ज्यादा रूपये बचाएगी और इसका सीधा फायदा किसानो को होगा . कियोंकि किसी भी स्टार्च वाली फसल जैसे आलू , अंगूर , गन्ना ,मक्का से एथेनॉल बनाया जा सकता है और अगर कभी इन फसलों की ज्यादा पैदावार से अगर इसके दाम गिरते हैं तो सरकार इन फसलों को खरीदकर इनसे एथेनॉल बना सकती है . इस कदम से किसान का भी नुकसान नही होगा और भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी बचेगा .

जल संकट का खतरा ?

पर्यावरण विशेषज्ञ मनु सिहं के मुताबिक पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का फैसला भारत के ग्राउंड वाटर को और कम सकता है जो इस समय अपने न्यूतम स्तर पर है . निति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में वर्ष 2007 से 2017 के बीच Ground Water 61% तक कम हो गया है और भारत का 70% ग्राउंड Water प्रदूषित है . ऐसे में पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल के पेट्रोल में मिलावट की सीमा 20% करने पर भारत जबरदस्त जल संकट झेल सकता है .

लगभग 20 वर्ष तक एथेनॉल इंडस्ट्री से जुड़े रहे डालमिया शुगर के पूर्व उप -महाप्रबन्धक रामेश्वर लाल गुप्ता के मुताबिक आज भारत में मॉडर्न टेक्नोलॉजी आ चुकी है.आज शुगर फैक्टरी में एथेनॉल के निर्माण के बाद जो कचरा निकलता है उससे शुगर फैक्टरियां बिजली तक का उत्पादन कर रही हैं.ऐसे में एथेनॉल का प्रोडक्शन बढ़ाने पर उसके वेस्ट प्रोडक्ट से बिजली बनाई जा सकती है चौतरफा लाभ भी होगा और जल प्रदूषण भी कम होगा.यह एक तरह का रेवोलुशन है जिसका फायदा किसानों को और आम इंसानों को भी होगा.

क्या होंगे नतीजें ?

पेरिस के क्लाइमेट सबमिट में भारत ने अपना कार्बन एमिशन 2070 तक शून्य करने का वादा किया था और इसी कड़ी में भारत लगातार कार्बन एमिशन को कम करने का प्रयास कर रहा है. जिसकी वजह से भारत मे इस समय पेट्रोल में लगभग 10% एथेनॉल की मिलावट होती है.पेट्रोलियम से चलने वाली कारों की तुलना में एथेनॉल कारें 70% कम हाइड्रोकार्बन. 30% कम नाइट्रोजन और 65% कम कार्बन मोनोऑक्साइड छोड़ती हैं.यही करण है कि एथेनॉल को ग्रीन फ्यूल भी कहा जाता है लेकिन सवाल यह है कि कहीं हम हवा साफ करने के चक्कर मे पानी से तो हाथ नहीं हाथ धो बैठेंगे.

Leave a Reply

Your email address will not be published.