अडानी पेश करते हैं दुनिया का सबसे बड़ा हरित हाइड्रोजन इकोसिस्टम

उर्जा शक्ति स्रोत है और शक्ति सृष्टी संचालन का आधार।मानव की मशीनों को शक्ति प्रदान करने हेतु उर्जा ही परम संसाधन है।इसके टिकाऊ स्रोत किसी देश के विकास की दिशा तय कर रहे हैं।जीवाश्म ईंधन की बिखरी हुई उपलब्धता और टिकाऊ उर्जा के दोहन मै तकनीकी सहायता ने देश के ओद्योगीकरण मै एक बड़ी भूमिका निभाई है।

इसी समस्या के भारत जैसे देश अब इसकी सर्वभोमिक उपलब्धता और सीमित पर्यावरणीय परिणामों के कारण उर्जा के नवीकरणीय और स्वछ स्रोतों के दोहन पर ध्यान केन्द्रित करना शुरू कर रहे हैं। इस दौड़ मै भारतीय निजी छेत्रअब देश को अपनी उर्जा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बनाने के कार्य मै अग्रणी है।

10 वर्षो मै $50 बिलियन का निवेश

भारतीय उर्जा उद्धम मै एक बड़ी छलांग लगाते हुए अडानी न्यू इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Anil)ने 10 वर्षो मै ग्रीन हाईड्रोजन मै लगभग 50 बिलियन अमरीकी डॉलर का निवेस करने की घोषणा की है। यह सौदा सयुंक्त रूप से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता मै कटौती और शुद्ध -शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दुनिया का सबसे बड़ा हरित पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की परिकल्पना करता है।

महत्वकांची लक्ष्य को ध्यान मे रखते हुए,अडानी समूह ने संयुक्त रूप से लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए फ्रांस की उर्जा दिग्गज टोटल एनर्जी के साथ एक नई साझेदारी की है।रणनीतिक गटबंधन बनाते हुए,Total Energies अडानी न्यू इंडस्ट्रीजलिमिटेड (Anil) मै अडानी इंटरप्राइजेज लिमिटेड (Ael) से 25% अल्पसंख्यक हिस्सेदारी अधिग्रहण करेगी।

अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी ने कहा,”दुनिया के सबसे कम खर्च में इलेक्ट्रान का उत्पादन करने की हमारी क्षमता को संचालित करेगा।यह साझेदारी कई रोमांचक डाउनस्ट्रीम रास्ते खोल देगी”।

स्वच्छ उर्जा बाजार को बाधित करने का लक्ष्य

फरवरी 2022 में भारत सरकार ने राष्ट्रिय हाइड्रोजन निति जारी की थी।इसका उद्देश्य उर्जा वाहक के रूप में जीवाश्म ईंधन से ग्रीन हाइड्रोजन में परिवर्तन को सुविधाजनक बनाना है।इस निति में हाइड्रोजन आधारित ईंधन की समानांतर अर्थव्यवस्था बनाने की परिकल्पना की गई है और लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निति में निम्नलिखित प्रावधान किए गए हैं –

अक्षय उर्जा का उपयोग करके पानी के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा उत्पादित हाइड्रोजन को ग्रीन हाइड्रोजन कहा जाएगा।

25 साल के लिए अंतरराजीय शुल्क में छुट।

ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्माण के लिए प्राथमिकता के स्तर पर कनेक्टिविटी दी जाएगी।

इस उद्देश्य के लिए अक्षय उर्जा पार्को में भूमि आवंटित की जा सक्ती है।

मैन्युफैक्चरिंग जोन बनाने का प्रस्ताव रखेगी सरकार।

सभी वैधानिक मंजूरी के लिए एकल पोर्टल।

पेरिस जलवायु समझौते में अपने महत्वकांक्षी योगदान (एंडडीसी) दायित्व के साथ,भारत अपनी उत्सर्जन तीव्रता को कम करने के लक्ष्य रखता है और साथ ही साथ उर्जा के अपने नवनीकरणीय शेयरों में उल्लेखनीय वृद्धि करने की योजना बना रहा है।इसके अलावा,अनिश्चित विश्व व्यवस्था और कच्चे तेल के बाजार में कीमतों में वृद्धि ने बजट के साथ -साथ देश के पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाला है।

इसलिए अक्षय स्रोतों के माध्यम से उर्जा की मांग को रणनीतिक रूप से सुरक्षित करने पर जोर दिया जा रहा है अडानी समूह के निरंतर निवेश और साझेदारी गटबंधन एक ही धीशा में निर्देशित हैं।हरित हाइड्रोजन में लगभग 50 अरब डॉलर का निवेश करने का महत्वकांक्षी लक्ष्य भारत नवीकरणीय बाजार को बाधित करेगा अंतत उर्जा की लागत को कम करेगा।

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